
आज कल तो हर जगह छपा होता है--कृपया करे गारेंटी की इक्चा नहीं,
इस का मतलब क्या उन का काम सही नहीं?
वादे तो सब करते है मगर निभाता कोई नहीं,
जो निभाता है वो भी सच्चे मन से निभा रहा है की नहीं इस की कोई गारेटी नहीं,
इस लिए दोस्तों ऊपर लिखी बाते सही है या नहीं,
इस की भी कोई कोई गारेंटी नहीं...
आज के रिस्तो को बाजार के आधार पर ढालने की एक कोशिश.
ये रचना भी ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित की गई थी...
और अब मेरे सारे मित्रो को समर्पित.