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I am a student of pgdm/mba in EMPI business school,New Delhi. Though i am not a professional writer but i love putting my inner heart's feeling into words and people say its a poems and me a poet; Yes i worked with All India Radio in my my teenage because of these poems which i wrote but still i don't feel like a poet or what ever.I feel these are just your feelings whom you give shape by writing in words. I never go behind any thing which i don't like, i am just king of my own kingdom. Love enjoying and spending time in traveling to new places and with nature. And more you can easily decide by analyzing my creations on the blog...

Tuesday, March 18, 2014


कर यकीन अपनी अपने मुक्कदर पे इतना
कि हर ख़ुशी तेरे कदमो में आएगी
क्यों रोता है "अभि " तू प्यार के लिए
क्यों दिल जलाता है अपना
जो खुद है अधूरा वो बस एक हसी सपना है
आँखों से तेरे गिरते आंसू का उसे कोई एहसास  नहीं
फिर भी उस पत्थर पे तेरा विस्वास कम नहीं
हर बार ठोखर खा कर भी  क्यों तू मुस्कुराता है "अभि "
क्यों यकीन नहीं तुझे अपने मुक्क़दर पे
कि हर ख़ुशी तेरे कदमो में आएगी
छोड़ दे जाने दे मत रोक उसे आज
गर होगी वो तेरे हाँथो कि लकीरो में
लौट आएगी एक दिन वापस तेरी इन बांहो में
जनता है तू सब कुछ फिर भी समझता नहीं
क्यों "अभि " तू अपने मुक्कदर पे यकीन करता नहीं
क्यों तू अपने मुक्कदर पे यकीन करता नहीं।

सप्रेम भेट
अभिनव अनुराग "अभि "

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